विकास की राह पर पिछड़ता भारत ।

विकास की राह पर पिछड़ता भारत ।

विकास की राह पर पिछड़ता भारत ।

हर रोज अखबारों और न्यूज चैनल में हम देश की विकास गाथा के बारे में सुनते हैं । हर सरकार अपने अपने कार्य काल में देश के विकास को इस तरह से पेश करती हैं कि हमें लगने लगता है कि आने वाले कुछ ही सालों में देश में सब कुछ अच्छा हो जाएगा और हम भी अन्य विकासशील देशों की जनता की तरह सुकून से रह पाएंगे, लेकिन जैसे जैसे समय बीतता जाता है, सरकार के विकासशील भारत की सच्चाई सामने आती जाती है और हम हर बार की तरह ही खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं । आज भी देश की कुछ ऐसी ही स्तिथि हैं, आप चाहे जिस भी क्षेत्र में नजर दौराएं आपको हर तरफ बस बेहाली का ही मंजर दिखाई देगा । स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, मूलभूत आवश्यकताएं, घर, बिजली, पानी, खाना और गरीबी इन सभी की खस्ता हालत में हम कैसे देश को विकासशील कह सकते हैं ।

हर बार की तरह कुछ दिनों पहले सत्ता में आई सरकार ने भी देश की जनता से विकास के लिए वायदे किये थे । सरकारी विभागों में दर्ज आकड़ों के अनुसार वो वायदे पूरे भी किए जा रहें हैं, लेकिन उन वायदों का लाभ किसको मिल पा रहा है, इस बात को न तो आपको पता है और न ही जैसे की अन्य जनता को । देश की विकास के नाम पर कुछ किलोमीटर सड़के बनी, कुछ बढ़िया अस्पताल खुले, कुछ लोगों को रोजगार मिला और कुछ लोगों को घर मिला, लेकिन क्या चंद लोगों को दी जाने वाली सुविधाओं से देश का समग्र विकास हो पाएगा ? क्या देश के संपूर्ण विकास के लिए गरीबों को मूलभूत आवश्यकताएं दी जाना जरूर नहीं है ? देश की जनता का बड़ा हिस्सा आज भी गांवों में बसता है | खुद आप ही इस बात पर विचार करें कि खेतों में कड़ी धूप में काम करने वाले किसान के लिए क्या सिंचाई की व्यवस्था हो पाई है ? क्या गांवों में सड़कों के पहुंच पाई है ? क्या जून की तपती गर्मी में लोगों को पर्याप्त बिजली मिल पाती है ? वहीं दूसरी ओर स्वास्थ सेवाओं पर बात करें तो आज भी भारत की जनता संक्रामक रोगों व कुपोषण से जूझ रही है । इसके अलावा 70 से ज्यादा बच्चें ऑक्सीजन के अभाव में मर गए | काम के अधिक घंटे और पर्यावरण प्रदूषण के कारण लोग हृदय संबंधी दिक्कतों, मधुमेह एवं कैंसर की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है । कई सामान्य रोग भी आज महामारी बन रही हैं और बड़े पैमाने में जनता को प्रभावित कर रहे हैं ।

भारत में 7,54,724 बिस्तरों वाले कुल 19,653 सरकारी अस्पताल हैं । अब आप ही विचार करें कि करीब 125 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले देश में मात्र 7.54 लाख बिस्तरों वाले अस्पतालों का होना क्या बेहतर स्वास्थ सेवाओं की ओर इशारा करता है । वहीं एम्स आदि कुछ बड़े सरकारी अस्पताल में जाकर एक बार घुमने से आप खुद ही वहां की मौजूदा हालत के बारे में समझ जाएंगे । इसके अलावा बेरोजगारी और गरीबी का बढ़ता स्तर देश की विकास गाथा को खुद-ब-खुद बयां करता है | माना की सरकार विदेशों से उद्योगों को भारत में ला रही हो और शहरों में चंद काम कर रही हो, परंतु वास्तव में तो देश के अमीर और गरीब लोगों के बीच का अंतर बढ़ता ही जा रहा है । ऐसे में विकास अमीरों के लिए ही होता दिख रहा है, जबकि गरीब और ग्रामीण इलाकों में बसने वाले लोगों के लिए आज के विकासशील भारत को समझ पाना बेहद मुश्किल है ।

 

Author /लेखिका :  Shikha Shree/  शिखा श्री

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